1. जमाबंदी नकल ऑनलाइन डाउनलोड कैसे करे
जमाबंदी (नकल) निकालने के 3 सबसे आसान तरीके: ई-मित्र, अपना खाता और मोबाइल ऐप
राजस्थान में अपनी जमीन का रिकॉर्ड (जमाबंदी/नकल) देखने और डाउनलोड करने के लिए सरकार ने तीन मुख्य विकल्प दिए हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी तरीके का चुनाव कर सकते हैं:
तरीका 1: अपना खाता पोर्टल (Apna Khata Portal)
यह सबसे लोकप्रिय तरीका है जहाँ आप घर बैठे फ्री में नकल देख सकते हैं।
- वेबसाइट apnakhata.rajasthan.gov.in पर जाएं।
- अपने जिले और तहसील का चयन करें।
- गाँव की लिस्ट में से अपना गाँव चुनें।
- अब आप नाम, खसरा नंबर, खाता संख्या या USN/GRN से नकल देख सकते हैं।
तरीका 2: ई-मित्र के माध्यम से (Digital Signed)
यदि आपको सरकारी काम या बैंक लोन के लिए डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signed) वाली नकल चाहिए, तो ई-मित्र सबसे अच्छा है।
- ई-मित्र पोर्टल लॉगिन करें और "Revenue Service" चुनें।
- "Jamabandi Nakal" सर्विस का चयन करें।
- जरूरी विवरण भरकर टोकन काटें।
- यहाँ से प्राप्त नकल हर सरकारी काम में मान्य होती है।
तरीका 3: मोबाइल ऐप के माध्यम से
तुरंत अपने मोबाइल पर रिकॉर्ड देखने के लिए आप "Dharti" या राजस्थान सरकार के आधिकारिक ऐप का उपयोग कर सकते हैं।
- Play Store से राजस्थान अपना खाता/धर्ती ऐप डाउनलोड करें।
- अपनी जमीन का विवरण डालकर पीडीएफ (PDF) सेव करें।
जमाबंदी निकालने की पूरी प्रक्रिया यहाँ देखें
2. भू-नक्शा ऑनलाइन डाउनलोड कैसे करे
खेत का नक्शा (Trace) निकालने के 3 तरीके: पोर्टल, ई-मित्र और मोबाइल ऐप
राजस्थान में अपनी जमीन का नक्शा (खसरा मैप) देखने और प्रिंट करने के लिए आप इन 3 माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं:
तरीका 1: भू-नक्शा पोर्टल (Official Portal)
यह फ्री तरीका है जिससे आप अपनी जमीन का नक्शा देख सकते हैं।
- bhunaksha.rajasthan.gov.in पर जाएं।
- अपना जिला, तहसील, RI, हल्का और गाँव चुनें।
- मैप में अपना खसरा नंबर डालकर 'Nakal' पर क्लिक करें।
- 'Show Report PDF' पर क्लिक करके अपना नक्शा डाउनलोड करें।
तरीका 2: ई-मित्र के माध्यम से (Certified Copy)
सरकारी कामों और बैंक लोन के लिए ई-मित्र से डिजिटल साइन वाला नक्शा प्राप्त करें।
- ई-मित्र पर 'Digital Signed Bhu-Naksha' सर्विस चुनें।
- खसरा नंबर और अन्य विवरण भरकर निर्धारित शुल्क का भुगतान करें।
- यहाँ से प्राप्त नक्शा आधिकारिक दस्तावेजों में मान्य होता है।
तरीका 3: मोबाइल ऐप (Dharti/Bhu-Naksha App)
तुरंत अपने मोबाइल पर नक्शा चेक करने के लिए आप ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- Play Store से राजस्थान का आधिकारिक राजस्व ऐप डाउनलोड करें।
- गाँव और खसरा नंबर सर्च करके मैप को PDF में सेव करें।
भू-नक्शा निकालने की पूरी वीडियो गाइड
3. गिरदावरी नकल डाउनलोड व आवेदन की प्रक्रिया
गिरदावरी क्या है, ऑनलाइन डाउनलोड कैसे करें और मोबाइल ऐप से आवेदन के नियम
गिरदावरी (Girdawari) एक महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेज है जो यह प्रमाणित करता है कि किसी खास मौसम (रबी/खरीफ) में खेत में कौन सी फसल बोई गई है। इसका उपयोग फसल बीमा और MSP पर फसल बेचने के लिए किया जाता है।
फसल गिरदावरी आवेदन (Mobile App से)
अब किसान स्वयं "SARA" (System for Agriculture & Revenue Administration) या राजस्थान सरकार के आधिकारिक ऐप से गिरदावरी कर सकते हैं:
- नियम: आवेदन केवल फसल बुवाई के समय (निर्धारित तारीखों के भीतर) ही किया जा सकता है।
- ऐप में लॉगिन करके अपने खेत के खसरा नंबर का चयन करें।
- खेत में खड़े होकर फसल की Geo-Tagged फोटो खींचनी होती है।
- विवरण सबमिट करने के बाद पटवारी द्वारा इसकी जांच और वेरिफिकेशन किया जाता है।
पोर्टल व ऐप से डाउनलोड
- Jan Soochna Portal या Apna Khata पर जाकर गिरदावरी विकल्प चुनें।
- जिला, तहसील और गाँव चुनकर खसरा नंबर डालें।
- यहाँ से आप अपनी गिरदावरी की कॉपी फ्री में देख और डाउनलोड कर सकते हैं।
ई-मित्र (Digital Signed)
- सरकारी लाभ और बैंक लोन के लिए ई-मित्र से डिजिटल साइन वाली गिरदावरी लें।
- ई-मित्र पर 'Print Girdawari' सर्विस का उपयोग करें।
- यह प्रति हर जगह कानूनी रूप से मान्य होती है।
आवेदन के जरूरी नियम:
- फसल गिरदावरी साल में दो बार (रबी और खरीफ) की जाती है।
- स्वयं आवेदन करते समय मोबाइल की Location (GPS) ऑन होनी चाहिए।
- गलत जानकारी भरने पर फसल बीमा क्लेम खारिज हो सकता है।
- पटवारी द्वारा वेरिफिकेशन होने के बाद ही गिरदावरी पोर्टल पर अपडेट होती है।
मोबाइल ऐप से गिरदावरी करने का सही तरीका
4. नामांतरण (Mutation) आवेदन व नकल प्रक्रिया
जमीन अपने नाम करवाने (दाखिल-खारिज) की पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया और नियम
नामांतरण (Mutation) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) में पुराने मालिक का नाम हटाकर नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है। इसे आम भाषा में 'दाखिल-खारिज' या 'नाम चढ़वाना' भी कहते हैं।
1. विरासत नामांतरण
किसी की मृत्यु के बाद उनके कानूनी वारिसों के नाम जमीन ट्रांसफर करना।
2. बैनामा (Sale Deed)
जमीन खरीदने या बेचने के बाद रजिस्ट्री के आधार पर नाम बदलना।
3. उपहार/हकत्याग
गिफ्ट डीड या परिवार में किसी के पक्ष में अपना हिस्सा छोड़ने पर।
ई-मित्र से आवेदन की प्रक्रिया (P-21)
नामांतरण के लिए ई-मित्र के माध्यम से P-21 फॉर्म भरा जाता है:
- ई-मित्र पर 'Mutation Application' सर्विस का चयन करें।
- मृत्यु प्रमाण पत्र (विरासत के लिए) या रजिस्ट्री की कॉपी (सेल डीड के लिए) अपलोड करें।
- आवेदन के बाद एक टोकन नंबर जेनरेट होता है, जिससे आप स्थिति ट्रैक कर सकते हैं।
- यह आवेदन ऑनलाइन पटवारी और फिर तहसीलदार के पास जांच के लिए जाता है।
नामांतरण स्थिति और नकल कैसे निकालें?
- Apna Khata Portal पर जाएं और 'नामांतरण की स्थिति' पर क्लिक करें।
- अपने जिले का चयन करके देखें कि आपका नामांतरण किस स्तर पर लंबित है।
- नामांतरण खुलने (मंजूर होने) के बाद आप नई जमाबंदी (नकल) डाउनलोड कर सकते हैं, जिसमें आपका नाम दर्ज होगा।
नामांतरण आवेदन की पूरी ऑनलाइन ट्रेनिंग
5. सीमाज्ञान एवं सहमति विभाजन प्रक्रिया
खेत की पैमाइश (नाप-चौप) और आपसी सहमति से जमीन बंटवारे की पूरी जानकारी
राजस्व विभाग में जमीन की सीमाओं को लेकर होने वाले विवादों को सुलझाने के लिए **सीमाज्ञान** और परिवार के बीच जमीन बांटने के लिए **सहमति विभाजन** की व्यवस्था की गई है।
सीमाज्ञान (Boundary Marking)
जब पड़ोसी किसान मेढ़ (Boundary) दबा लेता है या खेत की सही स्थिति जाननी हो, तब सीमाज्ञान किया जाता है:
- आवेदन: इसके लिए ई-मित्र के माध्यम से तहसीलदार के नाम आवेदन किया जाता है।
- शुल्क: सरकार द्वारा निर्धारित सीमाज्ञान शुल्क (टोकन) जमा करना होता है।
- प्रक्रिया: तहसीलदार द्वारा गिरदावर (ILR) और पटवारी की टीम गठित की जाती है जो मशीन या जरीब से खेत की पैमाइश करती है।
- रिपोर्ट: पैमाइश के बाद मौके पर ही पंचनामा तैयार कर सीमा पत्थर (बुरजी) गाड़ दिए जाते हैं।
सहमति विभाजन (Mutual Partition)
खातेदारों के बीच आपसी रजामंदी से होने वाला बंटवारा सबसे आसान और सस्ता होता है:
- धारा 53: राजस्थान कास्तकारी अधिनियम की धारा 53 के तहत आपसी सहमति से बंटवारा किया जाता है।
- दस्तावेज: सभी खातेदारों के आधार कार्ड, फोटो और एक सहमति पत्र (Agreement) की आवश्यकता होती है।
- फायदा: इसमें कोर्ट-कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़ते और पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर सबकी अलग-अलग जमाबंदी (खाता) जारी हो जाती है।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज:
सीमाज्ञान और बंटवारे की कानूनी प्रक्रिया समझें
6. राजफेड एवं MSP गेहूँ पंजीयन (FCI)
सरसों, चना, मूंग (RAJFED) और गेहूँ (MSP) खरीद हेतु अलग-अलग पंजीयन प्रक्रिया
(A) राजफेड पंजीयन (मूंग, मोठ, चना, सरसों)
राजफेड द्वारा रबी और खरीफ की तिलहन व दलहन फसलों की खरीद की जाती है।
- पोर्टल: इसका पंजीयन rajfed.rajasthan.gov.in के माध्यम से ई-मित्र द्वारा होता है।
- बायोमेट्रिक: इसमें किसान का जन-आधार आधारित बायोमेट्रिक या OTP सत्यापन अनिवार्य है।
- सीमा: इसमें एक किसान से अधिकतम 40 क्विंटल (या निर्धारित सीमा) तक की खरीद होती है।
- दस्तावेज: गिरदावरी (P-11), जमाबंदी, जन-आधार और बैंक पासबुक।
राजफेड (सरसों/चना) पंजीयन वीडियो गाइड
(B) MSP गेहूँ पंजीयन (खाद्य विभाग/FCI)
गेहूँ की सरकारी खरीद के लिए 'खाद्य विभाग' के अलग पोर्टल पर पंजीयन करना होता है।
- पोर्टल: इसके लिए vsp.rajasthan.gov.in (Procurement Portal) का उपयोग किया जाता है।
- प्रक्रिया: किसान को अपनी जमीन का विवरण और गेहूँ की अनुमानित मात्रा भरनी होती है।
- केंद्र चयन: इसमें किसान अपनी सुविधा अनुसार पास के FCI सेंटर या क्रय केंद्र का चयन कर सकता है।
- भुगतान: इसका पैसा सीधे जन-आधार से लिंक बैंक खाते में "e-PDS" के माध्यम से आता है।
गेहूँ (MSP) पंजीयन की लाइव प्रक्रिया
7. PM-Kisan सम्मान निधि योजना
पात्रता, लाभ, नया आवेदन और पेमेंट स्टेटस चेक करने की संपूर्ण जानकारी
**PM-Kisan योजना** के तहत भारत सरकार छोटे और सीमांत किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य खेती के खर्चों में मदद करना है।
योजना के लाभ
- सालाना ₹6,000 की आर्थिक सहायता।
- ₹2,000 की तीन किश्तें हर 4 महीने में।
- पैसा सीधे आधार लिंक बैंक खाते (DBT) में।
पात्रता (Eligibility)
- किसान के नाम खेती योग्य जमीन होनी चाहिए।
- संस्थागत भूमि धारक (Institutional) पात्र नहीं हैं।
- सरकारी कर्मचारी या आयकर दाता (Taxpayer) पात्र नहीं हैं।
नया आवेदन व सुधार (Edit)
नया आवेदन: ई-मित्र या PM-Kisan पोर्टल पर 'New Farmer Registration' पर जाकर आधार, जमाबंदी और बैंक विवरण के साथ आवेदन करें।
विवरण सुधार (Edit): यदि आधार में नाम गलत है या आवेदन में त्रुटि है, तो 'Updation of Self Registered Farmer' विकल्प का उपयोग करें। यहाँ से आप मोबाइल नंबर या आधार विवरण अपडेट कर सकते हैं।
पेमेंट और आवेदन स्टेटस चेक करें
किश्त का स्टेटस (Beneficiary Status)
'Know Your Status' पर जाकर रजिस्ट्रेशन नंबर से चेक करें कि कितनी किश्तें मिल चुकी हैं और अगली किश्त क्यों रुकी है।
आवेदन का स्टेटस (Self Registered)
नये आवेदन की स्थिति जानने के लिए 'Status of Self Registered Farmer' पर आधार नंबर डालकर चेक करें कि फॉर्म पटवारी या तहसीलदार स्तर पर कहाँ लंबित है।
- Land Seeding: जमाबंदी पोर्टल पर लिंक होनी चाहिए।
- e-KYC: बायोमेट्रिक या फेस OTP से केवाईसी पूर्ण होनी चाहिए।
- Aadhaar Bank Seeding: बैंक खाता आधार से मैप (NPCI) होना अनिवार्य है।
PM-Kisan स्टेटस चेक और सुधार की पूरी प्रक्रिया
8. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान की भरपाई और क्लेम पाने की पूरी जानकारी
**PMFBY** का मुख्य उद्देश्य ओलावृष्टि, सूखा, बाढ़ या कीटों के हमले से फसल बर्बाद होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। यह योजना ऋणी और गैर-ऋणी दोनों प्रकार के किसानों के लिए उपलब्ध है।
बीमा प्रीमियम की दरें
2.0%
1.5%
5.0%
*शेष प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
बीमा के लिए आवेदन कैसे करें?
- ऋणी किसान: जिन किसानों ने KCC लोन लिया है, उनका बीमा बैंक द्वारा स्वतः (Automatically) कर दिया जाता है।
- गैर-ऋणी किसान: वे किसान जिन्होंने लोन नहीं लिया है, ई-मित्र या CSC सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
- जरूरी दस्तावेज: आधार कार्ड, बैंक पासबुक, नवीनतम जमाबंदी और पटवारी द्वारा प्रमाणित बुवाई प्रमाण पत्र (Sowing Certificate)।
क्लेम (मुआवजा) पाने की प्रक्रिया
फसल खराब होने के 72 घंटों के भीतर सूचना देना अनिवार्य है।
- Crop Insurance App: किसान गूगल प्ले स्टोर से इस ऐप को डाउनलोड कर स्वयं नुकसान की रिपोर्ट कर सकते हैं।
- Toll-Free Number: संबंधित बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
- ऑफ़लाइन: अपने पास के कृषि कार्यालय या बैंक में जाकर फॉर्म जमा करें।
बीमा स्थिति (Status) कैसे जांचें?
pmfby.gov.in पोर्टल पर 'Application Status' में जाकर अपना रिसीप्ट नंबर डालें। यहाँ से आप चेक कर सकते हैं कि आपका प्रीमियम जमा हुआ है या नहीं और क्लेम की स्थिति क्या है।
फसल बीमा ऑनलाइन आवेदन और क्लेम की पूरी प्रक्रिया
9. फार्मर रजिस्ट्री (विशिष्ट किसान पहचान संख्या)
किसानों की डिजिटल पहचान और सरकारी योजनाओं का लाभ पाने हेतु नई अनिवार्य प्रक्रिया
**फार्मर रजिस्ट्री (Farmer Registry)** भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक डिजिटल पहल है, जिसके तहत प्रत्येक किसान को एक यूनिक **Farmer ID** दी जाएगी। यह आईडी आधार कार्ड की तरह काम करेगी, जिसमें किसान की जमीन और व्यक्तिगत विवरण लिंक होगा।
फार्मर आईडी क्यों जरूरी है?
- PM-Kisan: आने वाले समय में पीएम-किसान की किश्तें केवल उन्हीं को मिलेंगी जिनकी फार्मर आईडी बनी होगी।
- KCC लोन: बैंक से लोन लेने के लिए बार-बार दस्तावेज देने की जरूरत खत्म हो जाएगी।
- सरकारी सब्सिडी: खाद, बीज और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी इसी आईडी के जरिए मिलेगी।
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया (ई-मित्र हेतु)
लॉगिन: ई-मित्र पर फार्मर रजिस्ट्री सर्विस का चयन करें या आधिकारिक पोर्टल पर किसान के जन-आधार/आधार से लॉगिन करें।
लैंड मैपिंग: किसान के नाम दर्ज सभी खसरा नंबरों को जमाबंदी के माध्यम से सर्च करके 'Add' करें।
सत्यापन (Verification): आधार आधारित OTP या बायोमेट्रिक के जरिए किसान का ई-केवाईसी (e-KYC) पूर्ण करें।
आईडी जनरेशन: विवरण सबमिट होने के बाद सिस्टम द्वारा एक यूनिक **Farmer ID कार्ड** जेनरेट होगा जिसे आप प्रिंट करके दे सकते हैं।
आवश्यक दस्तावेज:
फार्मर रजिस्ट्री (Farmer ID) बनाने की लाइव ट्रेनिंग
10. कृषि यंत्र अनुदान योजना
ट्रैक्टर, थ्रेसर, कल्टीवेटर और अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों पर सब्सिडी की जानकारी
राजस्थान सरकार द्वारा किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने हेतु **कृषि यंत्रों** पर भारी सब्सिडी (अनुदान) दी जाती है। यह अनुदान श्रेणी (Category) के आधार पर **40% से 50%** तक होता है।
अनुदान की दरें
लागत का 50% तक
लागत का 40% तक
*अधिकतम अनुदान राशि यंत्र के प्रकार के अनुसार निर्धारित (Fixed) होती है।
किन यंत्रों पर मिलता है अनुदान?
आवेदन एवं चयन प्रक्रिया
- आवेदन: राजकिसान साथी पोर्टल (**rajkisan.rajasthan.gov.in**) पर जन आधार के माध्यम से ऑनलाइन।
- चयन: प्राप्त आवेदनों में से **लॉटरी (Online Lottery)** के माध्यम से किसानों का चयन किया जाता है।
- खरीद: चयन होने के बाद किसान को अधिकृत डीलर से ही यंत्र खरीदना होता है।
- सत्यापन: कृषि विभाग के अधिकारी द्वारा यंत्र का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाता है।
- भुगतान: सत्यापन सफल होने पर सब्सिडी सीधे किसान के बैंक खाते में जमा होती है।
आवश्यक दस्तावेज:
जन आधार कार्ड, आधार कार्ड, नवीनतम जमाबंदी (6 माह पुरानी न हो), और बैंक पासबुक।
कृषि यंत्र सब्सिडी ऑनलाइन फॉर्म कैसे भरें?
11. मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना - तारबंदी अनुदान
खेत की बाड़बंदी (Fencing) के लिए सरकार से आर्थिक सहायता पाने की पूरी प्रक्रिया
राजस्थान सरकार की **तारबंदी योजना** का मुख्य उद्देश्य आवारा पशुओं और नीलगाय (रोजड़े) से होने वाले फसल नुकसान को रोकना है। इसमें किसान को तारबंदी की लागत का एक निश्चित हिस्सा अनुदान के रूप में वापस मिलता है।
अनुदान की राशि (नई दरें)
लागत का 60% या अधिकतम ₹48,000 (जो भी कम हो)।
लागत का 50% या अधिकतम ₹40,000 (जो भी कम हो)।
*यह अनुदान अधिकतम 400 रनिंग मीटर की तारबंदी के लिए दिया जाता है।
आवेदन के लिए पात्रता एवं शर्तें:
- किसान के पास कम से कम **1.5 हेक्टेयर (करीब 6 बीघा)** खेती योग्य जमीन एक ही स्थान पर होनी चाहिए।
- यदि जमीन कम है, तो 2 या अधिक किसान मिलकर (समूह में) आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उनकी कुल जमीन 1.5 हेक्टेयर हो।
- एक किसान को केवल एक बार ही इस योजना का लाभ मिल सकता है।
- जमीन पर कोई विवाद या कोर्ट केस नहीं होना चाहिए।
आवेदन कैसे करें?
- राजकिसान साथी पोर्टल पर जन आधार के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करें।
- दस्तावेज: जमाबंदी (6 माह पुरानी न हो), नक्शा, जन आधार और बैंक डायरी।
- विभाग द्वारा 'First Come First Serve' (पहले आओ पहले पाओ) के आधार पर प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जाती है।
- स्वीकृति मिलने के बाद किसान को तारबंदी करवानी होती है और उसके बिल अपलोड करने होते हैं।
- पटवारी/कृषि पर्यवेक्षक द्वारा **भौतिक सत्यापन (Physical Verification)** के बाद पैसा खाते में आता है।
तारबंदी योजना का फॉर्म भरने की पूरी वीडियो ट्रेनिंग
12. खेत तलाई (Farm Pond) अनुदान योजना
वर्षा जल संचयन के लिए तलाई निर्माण पर सरकार से मिलने वाली भारी सब्सिडी
**खेत तलाई योजना** का मुख्य उद्देश्य वर्षा के पानी को इकट्ठा करके सिंचाई के काम में लेना है। इससे न केवल फसल की पैदावार बढ़ती है, बल्कि भू-जल स्तर में भी सुधार होता है। राजस्थान में कच्चे और पक्के (प्लास्टिक लाइनिंग) दोनों तरह के पोंड पर सब्सिडी मिलती है।
अनुदान की राशि (नए नियम)
कच्ची खेत तलाई
लागत का 60% से 70% या अधिकतम ₹63,000 से ₹73,500 तक (श्रेणी अनुसार)।
प्लास्टिक लाइनिंग तलाई
लागत का 60% से 70% या अधिकतम ₹90,000 से ₹1,05,000 तक (श्रेणी अनुसार)।
*न्यूनतम आकार 400 घन मीटर (20x20x3 मीटर) होना अनिवार्य है।
आवेदन हेतु पात्रता:
- किसान के पास कम से कम **0.3 हेक्टेयर (करीब 1.2 बीघा)** जमीन होनी चाहिए।
- जमीन किसान के स्वयं के नाम पर होनी चाहिए (संयुक्त खाते में आपसी सहमति जरूरी)।
- पट्टे वाली जमीन या मंदिर/ट्रस्ट की जमीन पर यह अनुदान देय नहीं है।
- एक किसान को पूरे जीवनकाल में केवल एक बार ही इस योजना का लाभ मिलता है।
आवेदन से भुगतान तक की प्रक्रिया
- ऑनलाइन आवेदन: राजकिसान साथी पोर्टल पर जन आधार के माध्यम से अप्लाई करें।
- स्वीकृति (Pre-Sanction): विभाग द्वारा फाइल चेक करने के बाद आपको निर्माण की अनुमति दी जाती है।
- निर्माण: अनुमति मिलने के बाद निर्धारित माप के अनुसार तलाई का निर्माण करें।
- सत्यापन: कृषि पर्यवेक्षक/सहायक कृषि अधिकारी द्वारा मौके पर आकर फोटो और माप लिया जाता है।
- भुगतान: वेरिफिकेशन सफल होने के बाद सब्सिडी सीधे आपके बैंक खाते में आ जाएगी।
आवश्यक दस्तावेज:
जन आधार कार्ड, जमाबंदी नकल (6 माह से पुरानी न हो), खेत का नक्शा, और बैंक पासबुक।
खेत तलाई ऑनलाइन आवेदन की पूरी वीडियो ट्रेनिंग
13. सोलर पंप (कुसुम योजना) अनुदान
खेत में फ्री बिजली के लिए सोलर पंप लगवाएं - सब्सिडी की नई दरें और आवेदन प्रक्रिया
**पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना** के तहत किसानों को सिंचाई के लिए डीजल और बिजली के पंपों की जगह सोलर पंप लगाने हेतु भारी सब्सिडी दी जाती है। राजस्थान में यह योजना उद्यान विभाग (Horticulture Department) द्वारा संचालित की जाती है।
नई सब्सिडी दरें (2026)
लागत का 60% अनुदान मिलता है। (30% केंद्र + 30% राज्य)
राजस्थान में SC/ST वर्ग के किसानों को अतिरिक्त अनुदान के साथ लगभग 100% तक लाभ की व्यवस्था है।
*नोट: किसान को केवल अपना हिस्सा (40% या निर्धारित राशि) ही डिमांड ड्राफ्ट या ऑनलाइन जमा करना होता है।
पंप की क्षमता और विकल्प:
- क्षमता: 3 HP, 5 HP और 7.5 HP के पंप उपलब्ध हैं।
- प्रकार: AC और DC सरफेस (Surface) या सबमर्सिबल (Submersible) पंप का चुनाव कर सकते हैं।
- शर्त: खेत में ड्रिप सिंचाई (Drip), फव्वारा (Sprinkler) या मिनी स्प्रिंकलर लगा होना अनिवार्य है, तभी सब्सिडी मिलती है।
आवश्यक पात्रता:
- किसान के पास कम से कम **0.4 हेक्टेयर (करीब 1.5 बीघा)** सिंचित भूमि होनी चाहिए।
- जमीन पर पानी का स्थायी स्रोत (कुआं, ट्यूबवेल या खेत तलाई) उपलब्ध होना चाहिए।
- यदि ट्यूबवेल पर पहले से बिजली कनेक्शन है, तो किसान सोलर पंप का लाभ नहीं ले सकता (जब तक कि वह बिजली कनेक्शन न कटवाए)।
आवेदन की प्रक्रिया:
- राजकिसान साथी पोर्टल पर जन आधार के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करें।
- दस्तावेज: जमाबंदी (6 माह पुरानी न हो), नक्शा, जन आधार और जल स्रोत का प्रमाण।
- वरीयता (Waiting List): विभाग द्वारा वरीयता सूची जारी की जाती है।
- डिमांड नोटिस: नंबर आने पर विभाग द्वारा 'डिमांड नोटिस' जारी होता है, जिसके बाद किसान को अपना हिस्सा जमा करना होता है।
- स्थापना: राशि जमा होने के 90 दिनों के भीतर कंपनी द्वारा सोलर पंप लगा दिया जाता है।
सोलर पंप योजना का ऑनलाइन फॉर्म और डिमांड भरने का तरीका
14. डिग्गी निर्माण अनुदान योजना
नहरी क्षेत्रों में जल भंडारण के लिए डिग्गी निर्माण पर मिलने वाली सरकारी सहायता
**डिग्गी अनुदान योजना** विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए है जहाँ सिंचाई नहर के माध्यम से होती है। पानी की बारी (बारीबंदी) के दौरान पानी को स्टोर करके बाद में सिंचाई के लिए उपयोग करने हेतु सरकार डिग्गी निर्माण पर अनुदान देती है।
अनुदान की नई दरें (2026)
लागत का 85% या अधिकतम ₹3,40,000 (जो भी कम हो)।
लागत का 75% या अधिकतम ₹3,00,000 (जो भी कम हो)।
*नोट: डिग्गी की न्यूनतम क्षमता 4 लाख लीटर (400 घन मीटर) होना अनिवार्य है।
आवेदन हेतु मुख्य पात्रता:
- किसान के पास कम से कम **0.5 हेक्टेयर (करीब 2 बीघा)** नहरी सिंचित भूमि होनी चाहिए।
- भूमि 'नहरी कमांड क्षेत्र' (Command Area) के अंतर्गत आनी चाहिए।
- किसान के पास सिंचाई के लिए **पानी की बारी (Pani ki Baari)** का निर्धारित हक होना चाहिए।
- एक ही खसरा नंबर पर पहले डिग्गी का लाभ नहीं लिया गया हो।
निर्माण एवं तकनीकी नियम
- डिग्गी **पक्की (Concrete)** या **प्लास्टिक लाइनिंग** वाली होनी चाहिए।
- डिग्गी के चारों ओर सुरक्षा के लिए **तारबंदी (Fencing)** और सीढ़ियां बनाना अनिवार्य है।
- निर्माण से पहले कृषि विभाग से **प्रशासनिक स्वीकृति (Pre-Sanction)** लेना जरूरी है।
- निर्माण के बाद विभाग के अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन (GPS फोटो के साथ) किया जाता है।
आवेदन कैसे करें?
ई-मित्र के माध्यम से **राजकिसान साथी पोर्टल** पर आवेदन करें।
जरूरी दस्तावेज: 1. जन आधार, 2. जमाबंदी (E-Sign), 3. सिंचाई विभाग द्वारा जारी बारी का प्रमाण (Passbook), 4. खेत का नक्शा (Trace)।
डिग्गी योजना का ऑनलाइन फॉर्म और तकनीकी जानकारी
15. गोपाल क्रेडिट कार्ड (GCC) योजना
पशुपालकों के लिए ₹1 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण (Interest-Free Loan)
राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की गई **गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना** का उद्देश्य पशुपालकों को चारे, दाने और अन्य आवश्यकताओं के लिए बिना ब्याज के अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराना है। यह योजना खेती के 'KCC' की तर्ज पर काम करती है।
ऋण की सीमा और ब्याज दर
₹1,00,000/- तक
0% (ब्याज मुक्त)
*समय पर पुनर्भुगतान करने वाले पशुपालकों को ब्याज पर 100% सब्सिडी दी जाती है।
आवेदन हेतु पात्रता:
- आवेदक राजस्थान का मूल निवासी और पशुपालक होना चाहिए।
- पशुपालक के पास कम से कम **एक दुधारू पशु** (गाय/भैंस) होना अनिवार्य है।
- पशु का **Tag Number (पंजीकरण)** होना आवश्यक है।
- पशुपालक किसी बैंक का डिफॉल्टर नहीं होना चाहिए।
आवेदन की प्रक्रिया
- ई-मित्र/बैंक: किसान ई-मित्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकता है या अपनी सहकारी बैंक शाखा में संपर्क कर सकता है।
- दस्तावेज: जन आधार कार्ड, आधार कार्ड, बैंक डायरी और पशु का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र/टैग नंबर।
- सत्यापन: पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं का भौतिक सत्यापन किया जाता है।
- कार्ड जारी होना: प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद सहकारी बैंक द्वारा 'गोपाल क्रेडिट कार्ड' जारी किया जाता है और ऋण राशि स्वीकृत होती है।
गोपाल क्रेडिट कार्ड का ऑनलाइन फॉर्म कैसे भरें?
16. मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना
पशु की आकस्मिक मृत्यु पर ₹40,000 तक का निःशुल्क बीमा कवच
**मंगला पशु बीमा योजना** के तहत राजस्थान के पशुपालकों के दुधारू पशुओं (गाय, भैंस), भारवाहक (ऊँट) और छोटे पशुओं (भेड़, बकरी) का **निःशुल्क बीमा** किया जाता है। इसका पूरा प्रीमियम राज्य सरकार वहन करती है।
बीमा राशि और कवरेज
₹40,000 तक
₹4,000 तक
*अधिकतम 2 दुधारू पशु या 10 छोटे पशुओं का बीमा निःशुल्क किया जा सकता है।
पात्रता एवं नियम
- आय सीमा: पशुपालक की वार्षिक आय ₹8 लाख से कम होनी चाहिए।
- टैगिंग अनिवार्य: बीमा के लिए पशु के कान में **Tag (ईयर टैग)** होना जरूरी है।
- प्राथमिकता: गोपाल क्रेडिट कार्ड धारकों और लखपति दीदी पशुपालकों को वरीयता दी जाती है।
- क्लेम अवधि: पशु की मृत्यु होने पर 21 कार्य दिवस के भीतर बीमा राशि का भुगतान किया जाता है।
आवेदन एवं स्टेटस चेक
mmpby.rajasthan.gov.in पोर्टल पर जन आधार के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण होता है।
स्टेटस कैसे देखें? पोर्टल पर 'Track Status' विकल्प में जाकर अपना जन आधार नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर वर्तमान स्थिति जान सकते हैं।
मंगला पशु बीमा ऑनलाइन आवेदन और क्लेम की पूरी ट्रेनिंग
17. ड्रिप एवं मिनी स्प्रिंकलर अनुदान
कम पानी में अधिक पैदावार के लिए सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों पर भारी सब्सिडी
**सूक्ष्म सिंचाई योजना (Micro-Irrigation)** के तहत खेती में पानी की बचत करने के लिए ड्रिप (बूंद-बूंद) और मिनी स्प्रिंकलर (छोटे फव्वारे) लगाने पर सरकार द्वारा विशेष आर्थिक सहायता दी जाती है। यह बागवानी और सामान्य फसलों दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
अनुदान की नई दरें (2026)
लागत का 75% तक अनुदान। इसमें SC/ST और महिला किसान भी शामिल हैं।
लागत का 70% तक अनुदान दिया जाता है।
*नोट: अनुदान की गणना भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानक लागत (Standard Cost) के आधार पर की जाती है।
ड्रिप सिंचाई (Drip)
यह पौधों की जड़ में बूंद-बूंद पानी पहुँचाता है। बागवानी (अनार, नींबू, अमरूद) और सब्जी की खेती के लिए सबसे उत्तम है।
मिनी स्प्रिंकलर
यह छोटे फव्वारे की तरह काम करता है। मूंगफली, सरसों, गेहूं और मिर्च जैसी फसलों के लिए बहुत प्रभावी है।
पात्रता एवं आवश्यक दस्तावेज
- किसान के पास स्वयं के नाम पर खेती योग्य भूमि और पानी का स्थायी स्रोत होना चाहिए।
- दस्तावेज: जन आधार, आधार कार्ड, नवीनतम जमाबंदी (E-Sign), खेत का नक्शा (Trace)।
- मिट्टी-पानी की जांच: कुछ क्षेत्रों में मिट्टी और पानी की टेस्टिंग रिपोर्ट भी आवश्यक होती है।
- कोटेशन: अधिकृत कंपनी/डीलर से प्राप्त सिस्टम का अनुमानित बिल (Quotation)।
आवेदन कैसे करें?
- राजकिसान साथी पोर्टल पर जन आधार के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करें।
- विभाग द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति (AS) जारी होने के बाद ही सिस्टम की खरीद करें।
- पंजीकृत कंपनी द्वारा खेत में सिस्टम स्थापित किया जाएगा।
- कृषि पर्यवेक्षक द्वारा **भौतिक सत्यापन (Physical Verification)** के बाद सब्सिडी सीधे बैंक खाते में आएगी।
ड्रिप एवं मिनी स्प्रिंकलर ऑनलाइन फॉर्म भरने की पूरी प्रक्रिया
18. चाफ कटर (कुट्टी मशीन) अनुदान योजना
पशुपालकों के लिए आधुनिक चारा काटने की मशीन पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी
**चाफ कटर योजना** का उद्देश्य पशुपालन में श्रम को कम करना और चारे की बर्बादी को रोकना है। राजस्थान सरकार द्वारा कृषि विभाग और पशुपालन विभाग के माध्यम से विभिन्न प्रकार की कुट्टी मशीनों पर अनुदान दिया जाता है।
अनुदान की राशि
लागत का 50% या अधिकतम ₹10,000 से ₹20,000 तक (मशीन की क्षमता अनुसार)।
लागत का 40% या अधिकतम ₹8,000 से ₹16,000 तक अनुदान देय है।
*नोट: इंजन/मोटर चलित और ट्रैक्टर चलित मशीनों के लिए अनुदान की राशि अलग-अलग होती है।
पात्रता एवं शर्तें:
- आवेदक के पास स्वयं के नाम पर खेती योग्य भूमि और **पशु (गाय/भैंस)** होने चाहिए।
- एक परिवार में केवल एक ही चाफ कटर पर अनुदान दिया जाता है।
- पिछले **5 से 7 वर्षों** में इस योजना का लाभ न लिया हो।
- मशीन केवल सरकार द्वारा **पंजीकृत डीलरों** या कंपनियों से ही खरीदना अनिवार्य है।
आवेदन की प्रक्रिया (How to Apply)
- ऑनलाइन पोर्टल: ई-मित्र के माध्यम से **राजकिसान साथी पोर्टल** पर आवेदन करें।
- दस्तावेज: जन आधार, आधार कार्ड, नवीनतम जमाबंदी, बैंक पासबुक और पशु होने का प्रमाण।
- प्रशासनिक स्वीकृति: विभाग द्वारा पात्रता जांच के बाद 'Pre-Sanction' जारी की जाती है।
- खरीद और बिल: स्वीकृति मिलने के बाद मशीन खरीदें और उसका जीएसटी बिल पोर्टल पर अपलोड करें।
- सत्यापन: कृषि विभाग के कर्मचारी द्वारा मशीन का भौतिक सत्यापन किया जाता है।